Saturday, August 24, 2024

Influence of others on us

आप मैं और शायद सब हमारे आस पास के लोगों से जरूर प्रभावित होते हैं । और वो भी बचपन से शुरू हो जाता है ये प्रभावित होने वाला काम। आप के जान पहचान में बहुत से लोग होंगे जो कुछ ज्यादा ही साफ सफाई या फिर किसी तरह की एक आदत में बंधे होते हैं। और वो भी ऐसी आदत जो  उतनी भी जरूरी नहीं है की उन्हें उतनी बुरी तरह अपना कर्तव्य मान लिया जाए। पर वो बंध जाते हैं जाने अंजाने में।आप लोग सोच रहें होंगे क्या बोल रहा है ये आदमी। चलो में आपको दो उदहारण देता हूं जो मेरे आस पास के लोगों में मेने देखे हैं । शायद तब आप लोग समझ पाओ की हम कुछ ऐसी बेमतलब की आदतों को साथ ले कर चल पड़ते हैं । जो हमारा समय और एकाग्रता को खराब करता है।

उदहारण 1: मेरे गांव में एक आदमी ऐसा है जो अपने काम को मजबूती से और अच्छे से करने के लिए जाना जाता है। और लोग उसके इस गुण की तारीफ भी जी भर के करते हैं। पर अब काम कम ही लोग करवाते हैं उस से। लोगों की तारीफ से उसने अपने मन में एक सोच बना ली है की मैं तो मजबूत काम करता हूं अगर मजबूत नही हुआ तो लोग बुरा मान जायेंगे। अब वो मजबूती के चक्कर में न तो काम को समय पर ख़त्म कर पता है ना ही काम को जल्दी जल्दी मैं आधे पर छोड़ सकता है। वैसे वो पेंटर है और जब मेने पूछा की मेने पेंट करवाना है तो वो बोला की टाइम लग जायेगा इस काम में पुट्टी को घोलने में 4 घंटे लगते हैं नहीं तो वो मिक्स नहीं हो पाती अच्छे से। बहुत से लोगो ने काम करवाया होगा अपने घर का आप लोग जानते होंगे की पुट्टी को घोलने में जाता टाइम नहीं लगता। पर वो अपनी छवि को लेकर इतना सख्त है की कोई मौका नहीं लेना चाहता जहां उसकी मजबूत काम की छवि को ठेस पहुंचे। पर मुझे लगता है जमाना बदल गया है। जरूरत से ज्यादा समय किसी के पास नहीं है । जो काम आधे घंटे में हो सकता है कोई उसके लिए चार घंटे क्यों बर्बाद करेगा। तो इस उदाहरण का मतलब यही है की लोगों की तारीफ में बंध कर खुद को ऐसा न दिखाने लग जाओ जो आप हो नहीं। बस आसपास के लोग आपके वैसे व्यवहार की तारीफ करते हैं तो आप अपने आप को उनके हिसाब से तो नहीं बना सकते। आप अपनी असल पहचान खो दोगे।

उदहारण 2 : मेरा एक भाई है। बचपन में वो शायद अपनी मां के डर से साफ सफाई करता था। और डर इतना था की मां नाराज न हो तो बहुत अच्छे से करता था। फिर मां भी जो और लोग आते थे उनके सामने अपने छोटे बच्चे की तारीफ करती थी की मेरा बच्चा मेरी मदद करता है और बहुत अच्छे से सफाई करता है। अब लोगो ने सीधा उसे बोलना शुरू कर दिया की वाह बच्चे क्या सफाई करी है।बच्चा भी खुश की मेरी तारीफ हो रही है। अब परिस्थिति ऐसी है की वो साफ सफाई को अपनी छवि मान चुका है । जहां एक बार झाड़ू लगाना हो वहां दो बार लगा देता है। चादर खुद सही करता है। चाहे बहन ने पहले सही करी हो। और रिश्तेदारों का क्या है वो तो आकर बोल देते हैं वाह बेटा क्या साफ सुथरा रखा है हमारे बच्चे तो सफाई ही नहीं करते। तो बंदा इसको अपनी तारीफ मान लेता है। पर क्या बार बार साफ करने से कुछ बदल तो नही जायेगा। अपनी बहन की या मां की की हुई सफाई उसे पसंद नहीं आती । शायद डरता है की कोई आएगा तो बोलेगा की आज तो वो सफाई नही है। तो बस लोगों की इस फिजूल सी तारीफ के लालच में वो अपना काम बढ़ा रहा है। जरूरी काम छोड़ कर।

में ये नहीं कह रहा की ये आदतें गंदी हैं। पर जहां जरूरत नहीं वहां भी इन आदतों में बंधे रहना । ताकि आपकी वो छवि न खराब हो जाए जो लोगों ने बेमतलब की तारीफ कर के आपको दे दी है। ये बहुत गलत करता है इंसान अपने साथ। और भी कई तरह के उदाहरण आपके आसपास आपको दिखेंगे जहां आपको लगेगा की इतनी भी जरूरत नहीं थी जितना ये आदमी कर रहा है।

मुझे लगता है शायद कुछ ही लोग इस से तुलना कर पाएंगे । पर मेने जब ये देखा तो खुद की आदतों में सुधार किया। लोगों की तारीफों से खुद को नहीं बांधा । शायद किसी के काम आ जाए मेरा ये तजुर्बा।

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